एक ख्याली सी लड़की

एक ख्याली सी लड़की हैं

जो अपने ख्यालों में रहतीं हैं

पुरी रात बर्बाद करके

पुरा दिन सोती हैं।

एक ख्याली सी लड़की हैं

जो मुझे सिर्फ कुछ दिनों से जानती है,

पर हमारी दोस्ती बहुत गहरी लगती है।

एक ख्याली सी लड़की हैं

जो मुझसे बातें करती है

कहता कुछ और हूं

समझ कुछ और लेती हैं।

एक ख्याली सी लड़की हैं

जो कभी कुछ और

तो कभी कुछ और कह जाती हैं।

एक ख्याली सी लड़की हैं

जो अपने आपको बहुत बहादुर समझती है

और रोज दुःख भरी दास्तां सुनाती है।

एक ख्याली सी लड़की हैं

जो कभी कभी अपने आशुओं से

अपने चश्मे का फ्रेम खराब करती हैं।

एक ख्याली सी लड़की हैं

जो मेरे ख्याल भी जानने की कोशिश करती है

और हमेशा डांट सुनकर

चुप हो जाती है।

एक ख्याली सी लड़की हैं

जो अपने ख्यालों में रहतीं हैं।।

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Caste & Religion Free Society

Sometimes I think what is happening with my India, the world knows that India is a unite country where people of different religions and castes live together, but today it has happened that Caste and religion have become our identity, we are forgetting our culture, the unity and integrity of India are our identity. Do not fight with each othe wer. We were so far behind fighting each other. How long will they fight like this? No one is different from each other, we are all alike. So please don’t abolish our future. Avoid this dirty politics and never support those who says wrong about religion and caste. We are one because we are Indians

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Not Racism and Religionism

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Happy Republic Day (as a formality)

भारतीय होने का गर्व हमें सिर्फ दो ही दिन महसूस होता है, 15 August, 26 January, और पूरे साल हम अपने देश को चाहे कितनी भी गालियां दे दें, पर उस दिन तो सिर्फ हमारा ही देश best हैं, और कोई तो आगे पीछे भी नहीं है। पर हम लोग ये कभी नहीं समझते और कभी समझ भी नहीं पाएंगे कि अवसर का लाभ उठाना देशभक्ति नहीं होती, कि हम सीने पर तिरंगा लगा लेंगे और तिरंगा को सोशल मीडिया पर डाल कर बधाई दे देंगे काम ख़त्म। हमारे यहां इसी को देशभक्ति कहते है। देशभक्ति वो होती हैं कि आप अपने देश के लिए कितना योगदान दे रहे हैं, उसके प्रति कितने वफादार हैं, अपने संविधान को कितना तवज्जो देते हैं, हम ऐसे देश में रहते हैं जहां हमें हर चीज करने की आजादी है, हमारे पास वो सारे अधिकार है कि हम किसी नेता, किसी सरकार को गिरा सकते हैं किसी को बना सकते हैं, बात तो ये है कि कोई चाहता ही नहीं अपने देश को जानना, अपने अधिकारो का उपयोग करना। अगर हमारे देश के 15%-20% लोग भी अपना काम सही से करने लगे तो ये निश्चित रूप से कहता हूं कि ना महंगाई रहेगी, ना सरकार कुछ ग़लत कर सकेंगी, ना हम पीछे रहेंगे। हम गणतंत्र दिवस या स्वतं‌त्रता दिवस हम इसलिए नहीं मनाते कि हम उस दिन हम सबको बधाईयां देते रहे और काम खत्म। बल्कि हमें तो ये देखना चाहिए कि हम इतने वर्षों बाद क्या किये कितना आगे बढ़े। किंतु हम ये तो करते नहीं हैं उल्टा देश को ही कोसते हैं, दुसरे देशों के साथ तुलना करके नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। तो मेरी बस यही प्रार्थना है कि कृपया अपने देश के बारे में पढ़ें, और राजनीतिक चेहरे को हटाकर इस देश को जानने की कोशिश करें…..

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बचपन के दिन (वो दिन याद आते हैं)

वो दिन याद आते हैं,

जब हम युही गलियों में घूमा करते थे

वो दिन याद आते हैं,

जब हम युही गलियों में घूमा करते थे

किसी को गाली, किसी को थप्पड़, किसी को प्यार

बस युही दे दिया करते थे

वो दिन याद आते हैं,

जब मां के हाथों की रोटी और दादी मां के हाथों का प्यार पसंद किया करते थे।

वो दिन याद आते हैं,

जब हम रोया करते थे तो सभी युही दौड़ कर आ जाया करते थे

कभी मां के तो कभी दादी मां के गोद में युही घुमा करते थे।

वो दिन याद आते हैं,

जब हम मेले में युही हर एक चीज के लिए रोया करते थे

वो दिन याद आते हैं,

जब हम अलग-अलग तरह के खिलौनों को देखकर युही उक्षल जाया करते थे।

वो दिन याद आते हैं,

जब घर में चाहे जितने भी खिलौने हो पर दुसरो का देखकर हम युही मुंह बना लिया करते थे।

वो दिन याद आते हैं,

जब हम बहुत शैतानियां करते थे, दुसरो का सुनकर हम युही कभी इसकी, कभी उसकी, कभी मां की, कभी बहन की गालियां दे दिया करते थे।

वो दिन याद आते हैं,

जब हमारी सुनहरी गालियों को सुनकर घर वाले दो तीन थप्पड़ युही दे दिया करते थे।

वो दिन याद आते हैं।

वो दिन याद आते हैं।

वो दिन याद आएंगे।

वो दिन याद आएंगे।

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